चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय (Panjab University) परिसर में 1 से 3 मई 2026 तक आयोजित 5वां इंडियन ट्रेडिशनल स्पोर्ट्स एंड गेम्स फेस्टिवल 2026 भारतीय संस्कृति, परंपरा और खेल भावना का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। इस भव्य आयोजन का सफल संचालन ट्रेडिशनल स्पोर्ट्स एंड गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन पंजाब के माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया द्वारा किया गया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेल न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाते हैं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं से इन खेलों को अपनाने और आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

तीन दिवसीय इस महोत्सव में योग सहित लगभग 15 पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया, जिनमें गिल्ली-डंडा, गतका, लाठी, पिट्ठू, खो-खो, अट्या-पट्या, कबड्डी, मल्लखंभ, मल्लयुद्ध, पच्चीसी और रस्सीकूद प्रमुख रहे। देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 1200 खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

यह महोत्सव केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage) को संरक्षित और प्रोत्साहित करने का एक सशक्त माध्यम भी बना। UNESCO की सांस्कृतिक विरासत की अवधारणा के अनुरूप ऐसे आयोजन पारंपरिक खेलों को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समापन समारोह में चंडीगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के सचिव द्वारा विजेता खिलाड़ियों को पदक एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजन समिति के प्रमुख पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. राकेश मलिक (अध्यक्ष, फेडरेशन एवं निदेशक खेल), सोनी भारत (महासचिव), मास्टर बी.के. भारत (अध्यक्ष, एशियन ट्रेडिशनल स्पोर्ट्स एंड गेम्स एसोसिएशन), आर.के. भारत (सचिव, नेशनल मार्शल आर्ट्स कमेटी इंडिया) तथा नीरज मेहरा (अध्यक्ष, एनसीएसपीई) प्रमुख रूप से शामिल रहे।

इस सफल आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत के पारंपरिक खेल आज भी युवाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं। उचित मंच और प्रोत्साहन मिलने पर ये खेल न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।